Question.1 ध्यान की परिभाषा लिखिए।
ध्यान की परिभाषा
"Meditation is the way to enter into the grandeur inner Kingdom and build a bridge to inner and Outer world. It is the most essential part of the yogic practice."
A. योग दर्शन के अनुसार
"देश बन्धश्चित्तस्य धारणा" (योग दर्शन 3.1)
"तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्" (योग दर्शन 3.2)
"मन प्राण के सभी मलो का नाश करके, इंद्रियों को अपने-अपने विषयों से समेट कर, मन को शरीर के किसी स्थान विशेष पर समाहित करके, उस देश विशेष में ध्यायमान विषय को आलंबन बनाकर, ज्ञान की एकतानता प्राप्त हो उसे ध्यान कहते हैं। ध्यायमान विषय के ज्ञान का अखंड प्रवाह ही ध्यान है। "
B. सांख्य दर्शन के अनुसार
"ध्यानं निर्विषयं मनः" (सांख्य सूत्र 6.25)
"मन के निर्विषय होने को ही ध्यान कहते हैं । निर्विषय का अर्थ जब कोई भी सांसारिक विषय इंद्रियों अथवा मन में नहीं रहता अपितु वह ब्रह्म में ही पूर्ण लीन रहता है ध्यान कहलाता है।"
C. घेरंड संहिता
घेरंड संहिता के छठवें अध्याय मे महर्षि घेरंड ने ध्यान का वर्णन किया है जिसमें ध्यान के तीन प्रकार बताए हैं-
▪︎स्कूल ध्यान
▪︎ज्योति ध्यान
▪︎ सूक्ष्म ध्यान





